प्रस्तुत है एक दिल को छू लेने वाली कविता —
“बीतते हुए पल”,
जिसमें बीते हुए दिनों की याद, समय की रफ़्तार, और उन पलों का दर्द है
जो कभी लौटकर नहीं आते।
इस कविता में आपको मिलेगा:
✔ वक़्त के गुज़रने की कसक
✔ पुरानी यादों की मिठास
✔ अधूरे पलों का दर्द
✔ मन की भावनाओं का सच
अगर आप भी कभी सोचते हैं—
“काश वक़्त थोड़ा और रुक जाता…”
तो यह कविता आपके दिल को ज़रूर छू जाएगी।
✨ “बीतते हुए पल” ✨
**दिन बीतते जा रहे हैं,
अपनी यादों को समेटे हुए।
हर शाम एक नया अफ़सोस लाती है,
और हर सुबह कोई पुराना लम्हा जगा जाती है।
पल–पल याद करता हूँ
इन बीते दिनों को…
कभी हँसी के, कभी दर्द के,
कभी अनकही बातों के,
कभी खोए हुए ख़्वाबों के।
काश… कुछ दिन और ठहर जाता
ये बीतता हुआ वक़्त,
कुछ लम्हे और मिल जाते,
कुछ बातें पूरी हो जातीं,
कुछ रिश्ते सुलझ जाते,
कुछ दिल एक बार फिर खुलकर हँस पाते।
समय की रफ़्तार बड़ी बेरहम है—
रुकता नहीं, मुड़कर देखता नहीं,
और हम बस बैठे रह जाते हैं
उसकी धूल से भरी यादों के साथ।
फिर भी…
इन यादों में ही तो छुपा है मेरा आज,
और इन्हीं अधूरे पलों में बसती है
मेरी ज़िंदगी की सबसे ख़ूबसूरत आवाज़।**
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