🪞 “शीशा चेहरा दिखाता है, ज़िम्मेदारियाँ असलियत — दोनों मिलकर इंसान की पहचान बनाते हैं।”
🪞 “शीशा और ज़िम्मेदारी” – एक दिल छू लेने वाली हिंदी कविता 🌸
“शीशा और ज़िम्मेदारी” एक भावनात्मक हिंदी कविता है जो जीवन की सच्चाई, रिश्तों की नाज़ुकता और जिम्मेदारियों के बोझ को गहराई से दर्शाती है। यह कविता बताती है कि जैसे शीशा चेहरा साफ़ दिखाता है, वैसे ही जीवन हमारी असलियत खोल देता है। रिश्तों की जिम्मेदारी निभाना ही इंसान की असली पहचान और ईमान का प्रमाण है। पढ़िए यह प्रेरणादायक और दिल छू लेने वाली कविता।
ज़िंदगी का आईना जब हमें खुद दिखाता है, तो पता चलता है कि बेफ़िक्र मुस्कुराहटों के पीछे कितनी ज़िम्मेदारियाँ छुपी होती हैं।
यह कविता उन सभी के लिए है जिन्होंने वक़्त से पहले वक़्त का बोझ उठाया है। ✨
🪞 शीशा और ज़िम्मेदारी 🪞
शीशा जब देखता हूँ,
तो अपना ही चेहरा नज़र आता है,
पर आँखों के पीछे छुपा बोझ
सिर्फ़ मुझे ही दिख पाता है।
चेहरे पर मुस्कान होती है,
पर दिल में ज़िम्मेदारियों का बोझ,
जैसे शीशा सच दिखा दे,
वैसे ही जीवन भी असलियत खोल देता है।
शीशा टूट जाए तो फिर भी नया मिल जाता है,
पर रिश्तों की ज़िम्मेदारी टूट जाए,
तो उम्रभर उसका बोझ रह जाता है।
इसलिए…
शीशे की तरह साफ़ रहो,
और ज़िम्मेदारियों को निभाओ,
क्योंकि यही असली पहचान है —
इंसान और उसके ईमान की।

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