The Most Beautiful Phase of Life
बचपन और मासूमियत: वो दिन जब ज़िंदगी सबसे आसान थी
बचपन और मासूमियत ज़िंदगी का वो सबसे खूबसूरत दौर होता है, जहाँ न चिंता होती है और न जिम्मेदारियों का बोझ। यह ब्लॉग बचपन की उन्हीं मासूम यादों, सच्ची खुशियों और बेफिक्र पलों को शब्दों में पिरोता है, जिन्हें हम बड़े होकर अक्सर खो देते हैं। अगर आप भी अपने बचपन की गलियों में लौटना चाहते हैं, तो यह लेख आपके दिल को ज़रूर छुएगा।
🌼 बचपन और मासूमियत 🌼
बचपन के वो दिन निराले,
न कोई चिंता, न कोई हवाले।
खिलौनों की दुनिया, हंसी के मेले,
छोटे-छोटे सपने, कितने भोले-भाले।
ना मन में कोई चालाकी,
ना दिल में कोई बनावटी कहानी,
हर शब्द में सच्चाई बसती,
हर नज़र में मासूमियत झलकती।
कभी मिट्टी में खेलना अच्छा लगता,
तो कभी बारिश में भीगना भाता।
गुड़िया-गुड्डे की शादी रचाते,
कागज़ की नाव समंदर में तैराते।
काश वो बचपन लौट आता,
फिर वही मासूम दिल पाता।
जहाँ हंसी सच्ची और बेफिक्र होती,
और ज़िंदगी सपनों जैसी लगती।
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आपकी बचपन की सबसे प्यारी याद कौन-सी है?
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