यह कविता “पछतावा” उन अनकही बातों और छूटे हुए पलों की कहानी है, जो समय निकल जाने के बाद दिल में बोझ बनकर रह जाते हैं।
यह भावुक हिंदी कविता हमें याद दिलाती है कि ज़िंदगी में सही समय पर बोले गए शब्द रिश्तों को बचा सकते हैं, जबकि देर होने पर केवल पछतावा ही हाथ आता है। समय, रिश्ते और आत्ममंथन की सच्चाई को दर्शाती यह रचना हर उस व्यक्ति से जुड़ती है जिसने कभी कुछ कहने का मौक़ा खो दिया हो।
💔 पछतावा 💔
कभी जो बातें कहनी थीं,
वो रह गईं अधूरी,
अब शब्द नहीं मिलते,
बस खामोशी है ज़रूरी।
वक़्त था जब हँस सकते थे,
आज आँसू में डूबे हैं,
कभी जो अपने थे क़रीब,
अब यादों में रूठे हैं।
किया जो गलत, अब समझ आया,
सही वक्त पर जो समझता,
तो शायद ये हाल न आता।
ज़िंदगी सिखा गई एक बात —
समय किसी का इंतज़ार नहीं करता,
जो आज है, वही सच है,
कल सिर्फ़ पछतावा छोड़ जाता।
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